दिल्ली
दिल्ली,
मेरा शहर नहीं,
एक साज़िश है शायद,
दिल्ली में बात नहीं होती,
रफ़्तार होती है,
दिल्ली में हवा साफ़ नहीं होती,
अफ़वाह होती है,
दिल्ली में बुनियाद नहीं होती,
गवाही होती है,
दिल्ली में चुनावों में रात नहीं होती,
नुमाइश होती है,
दिल्ली में वुसअत नहीं होती,
सल्तनत से नेहरू तक की याद होती है,
दिल्ली में फ़रियाद नहीं होती,
बस पुलिस तैनात होती है,
दिल्ली,
मेरा शहर नहीं,
एक साज़िश है शायद।
~ चेतना 🌻
🤌
ReplyDeleteThanks for reading ❤️
DeleteTruly said❤️
ReplyDeleteThanks for reading ❤️
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