तू आया है शहर में

तू आया है शहर में,
मगर बेताबी यही छोड़ जाना।
गांव जाकर घुटन किसी को मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर जमघट में खो न जाना।
गांव जाकर इमारतें बनाना किसी को मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर भूख के मारे मर मत जाना ।
गांव जाकर बटवारा करना किसी को मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर लालसा से जी मत भटकाना।
गांव जाकर स्त्रियों को बिकना मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर दौलत ही कमाना।
गांव जाकर खेतों को दांव पर रखना मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर हृदय ना पिघलाना।
गांव जाकर किसी को पत्थर बनना मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर रिश्ते से ना घिर जाना ।
गांव जाकर भाई भाई को लड़ना मत सिखाना।।

तू आया है शहर में,
मगर शहर में ही मत रुक जाना,
गांव जाकर किसी को शहर में रुक जाना मत सिखाना।।

~चेतना 🌻

Comments

  1. So deep ❤️❤️

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  2. Nice , you are such a great writer.
    your content is heart touching

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  3. This is so good yaar ✨🔥

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  4. So beautifully written❤️❤️❤️

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  5. Very Very Nice Written ❤️❤️

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  6. Beautifully written ❤️

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  7. Heart touching content 😍❤️

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  8. अच्छे ने अच्छा जाना है तुम्हें ,
    बुरे ने बुरा जाना है तुम्हें ,
    कदम कदम पर इम्तेहान रखती है जिंदगी ,
    तुम्हें भी और उसे भी सोच समझ कर चलना है ,
    ये पढकर अच्छा लगा कि तुम किसी और को मंजिल दिखा रहे हो l

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  9. मे आया हूं इस ब्लॉग में,
    बिना पढ़े नहीं जाऊंगा,
    गाव जाकर कविता किसे कहते, ये सबको बतलाउगा।
    Sry for bad hindi, i myself am blogger but we both are having different stories to tell. I appreciate your efforts, keep going.

    Regards

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