ज़रा सुनो
ये खाली खाली रातें
जैसे बेचैनी मांग रही हो ।
ये बेचैनी दिलो दिमाग की,
कहीं खालिपन ढूंढ रही हो।
ये सोती हुई दुनिया
जैसे जिंदगी मांग रही हो।
ये जिंदगी इस दुनिया की ,
कहीं नींद ढूंढ़ रही हो।
ये नायक की निगाहें
जैसे मुहब्बत मांग रही हो ।
ये मुहब्बत जैसे नायकी की ,
कहीं निगाहें ढूंढ़ रही हो।
ये तड़प विश्वास की
जैसे वारि मांग रही हो।
ये वारि जैसे धोखे की ,
कहीं प्यास मांग रही हो।
ये सौगत खुशी की
जैसे मसान मांग रही हो।
ये मसान जैसे मुर्दे की,
कहीं जान ढूंढ रही हो।
~चेतना 🌻
❤️❤️
ReplyDelete🌺💖
Delete👏👏❤️❤️ as always dil jeet li meri💜💜
ReplyDeleteThank you 🥺💕👀
DeleteAdhbut चेतना ❤🔥
ReplyDeleteDhanyawad 🤞
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