आँखें

कमाल की है वो आँखें, 
जिसमें भरी है करूणा
प्रार्थना और क्षमा मेरे लिए, 
जो मुझे नज़र नहीं आती। 

कमाल की है वो आँखें, 
जो नहीं भूल पा रही 
मेरे पिछले जन्म के
नाममात्र परोपकार को। 

कमाल की है वो आँखें, 
जिनसे बनती है नींव 
भरोसे और ईश्वर की, 
और मेरे सामर्थ्य की। 

कमाल की है वो आँखें, 
जिनमें छिपे हैं अश्रु अनेक
बह नहीं पाते अकसर 
सोच कर मेरा डर। 

कमाल की है वो आँखें, 
जो देख चुकी हैं कपट, 
छल, अलगाव संसार के 
पर प्रेम बहाए मेरे लिए। 

~ चेतना🌻

Comments

  1. Actually i want to say thanks ☺️

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  2. कमाल के हो आप जो इतने अच्छे से पढ़ लेते हो आँखे
    ऐसे कवियाना अंदाज़ में घड़ देते हो किसी की आँखे

    ReplyDelete

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