झोपड़ी

एक मटका पानी का खाली, 
तीन बच्चों के दूध की एक ही प्याली, 
ईन्धन हो तो घर का चूल्हा जल जाए, 
माई, ये पेट इतनी रात में किसे बेच आए, 
बेच आए या पूरे खुद बिक जाए, 
या उमडे़ सैलाब को अंदर निगल जाए, 
रात है काली, माँ ने भी बात टाली, 
आज फिर आस को भूख में उबाली, 
जिस रात जोर से बरसात होती है, 
एक झोपड़ी जरूर बर्बाद होती है। 
जिस रात गरीबी अनाथ होती है, 
एक झोपड़ी जरूर बर्बाद होती है। 
एक झोपड़ी जरूर बर्बाद होती है।। 

~ चेतना 🌻

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