फरियाद
अर्ज किया है
तीसरा पहर भी शर्मा सा गया
जब लैला की बेपरवाह नींद के लिए
सिरहाने पर मजनू का कंधा आ गया।
"अब नहीं आता, तू ही ढूँढ़ मुझे"
फिर आशिक का दिल घबरा गया
ज़माने से भी तिरस्कार खा
माशुका के इश्क़ को दीमक खा गया।
किश्तों पर उठाए सवाल
पर भी दुगना कर्जा आ गया
दिल तोड़े माशुका हस कर
फरियाद करता शायर आ गया।
जश्न-ए-रेख़्ता में
खामखां बवाल छा गया
नज़र इश्क़ को लगी पर
इल्ज़ाम चांद पर आ गया।।
~ चेतना 🌻
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