राही

ए राही
तेरा क्या ठिकाना है? 
दुनिया भाती नहीं तुझे
ये तो बस बहाना है
कोई सवाल खड़ा हो ना
इसलिए तुझे चलते जाना है। 

बोल ना
तुझे कितनी दूर भाग जाना है
पसंद तो तुझे भी है घर की रोटी
वक़्त ना मिलना तो बस बहाना है
याद में होगी तेरी प्यारी उर्मि भी 
लक्ष्मण का तो फ़र्ज़ निभाना है । 

ए साथी
सुना है अहसानों का बोझ पुराना है
मैं तुझे जानती हूँ शायद
अंदेखा कर मुझे भी कदम बढ़ाना है
कमाल है दुनिया भी
दो शब्द की बचत इसका खजाना है। 

ज़रा सोच
अंत में राख जितना बच जाना है
होड़ में है उड़ान की तू भी
सीमाओं से इश्क़ तुझे भी लड़ाना है
सफरनामा की कविताएँ सुन
तुझे मंजिल से जल थोड़ी जाना है। 

ए योगी 
तेरा तप तुझे खुद से छुपाना है
अगर बहक गया मेरी बातों से
तो तेरा थोड़ी ना कुछ जाना है
तेरे प्रसंग लिखे मैंने हज़ार-लाख बार 
फिर भी दोष मेरी कलम पर आना है।। 

~ चेतना 🌻

Comments

  1. वाह! उत्तम, अत्ती उत्तम , एसे ही लिखते रहिये और लोगो को प्रेरित करते रहिए |👏❤️🌤️

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  2. Mad at your poetries ❤️😻

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  3. Really good skills

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  4. Rahi chelta chel
    Tu ruk mat
    Thak mat
    Har mat
    Behkawe mat aa
    🤖😼

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  5. I like your all poems 🥇

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