कहानियाँ
कभी हैरानी नहीं हुई
कि आखिर कितनी गहराई है
और कितनी गहराई हो सकती है
क्या उस सागर जितनी
जिसके अंत तक जाकर
सब तिमिर बन जाता है ?
क्या पुस्तकालय जितनी
जिसकी महक से शर्मा जाए
रानियों का बागीचा भी?
क्या राधा के वियोग जितनी
जिससे उद्धव भी घबरा
भूल गए सारी कूटनीति?
क्या जननी के तप जितनी
जिसकी अंतिम साँस से
मिल जाता है किसी को पहला सांस?
पता है शब्दों के पार भी
एक संसार है बहुत दयालु
पर कितना दयालु है
क्या प्रेम में पड़े पुरुष जितना
जिसकी मुस्कान और आँसू
कर देते हैं माफ़ उसकी प्रेयसी को?
क्या कहानियों जितना
जिनमें हवाएँ हैं, तूफान भी
किंतु अंतराल में शांति भी?
क्या वर्तमान जितना
जिसे बीतने का भय नहीं
और इंतज़ार का सुख नहीं?
क्या संघर्ष जितना
जिसे कोई देख नहीं पाता
पर जिता वो सबको देता है?
संसार के कुछ नियम हैं
भय, भ्रम और भरोसा
पर इनकी सीमा कितनी है
पर्वत के परोपकार जितनी
जो बहती हुई नदी के लिए
ठोस बन जाता है सदियों तक?
क्या अदृश्य सत्य जितनी
जो उतना ही उलझा है
जितना झूठ बोलता इंसान?
क्या विनाश जितनी
जिसका जन्म ही होता है
मृत्यु को जीवन देने के लिए?
क्या खूबसूरती जितनी
एक शिशु में है, एक मुर्दे में भी
एक कैद में है, एक उड़ान में भी??
~चेतना 🌻
जो बाहर की सुनता है, वो बिखर जाता है और जो अंदर की सुनता है वो संवर जाता है। 👼
ReplyDeleteWoww nice👏 ❤🤠
DeleteHey mam, I’m reading your blogs since last 1.5 years and i love the way you write ✍️ 💕💞
ReplyDeleteLove this poetry so much
ReplyDelete💕💞🩷🩵
ReplyDelete