सावन
रात यूहीं थमी रहे
मुझे सवेरे कम भाते हैं
चुप कर दे ये दुनिया को
मुझे उनके शब्द बडे़ सताते हैं।
तपिश भरी हुई हृदय में
जिसे सब इश्क़ बताते हैं
पर एक पल जता दिया तो
सब दोष के घडे़ भर जाते हैं।
मिज़ाजों में डूबे सावन को
नासमझ आशिक गले लगाते हैं
पूरी वक्त के स्वप्न दिखाकर
वो आधे दौर में ही गुजर जाते हैं।
खाली आँगन में एकांत में लटके
नादान झूलें 'अब लौट आओ' गाते हैं
चौखट तक थमे पैर नायिका के
थोड़ी आहट पर बाहर भागे आते हैं।
मोह में गिरे आँखों से तो आँसू बने
विरह में गिरे तो लहू सा रंग चढ़ाते हैं
किया इंतजार और वो आए भी
प्रियतम ऐसे ही साजन बन जाते हैं।।
~ चेतना🌻
Wohoooo... Kafi pyari😃😃
ReplyDeletehihi ❤
Delete