भोर

सूरज निकलेगा कल भी
परंतु नूतन भोर कब होगी ? 

चंद्रमा को तलाश जिसकी
वो नन्ही चकोर कहाँ होगी? 

पवन को भी चीर चले जो
वो दुर्गा कमज़ोर थोड़ी होगी? 

कच्ची मिट्टी की गुडिया अब
बिखरे बिना कठोर कैसे होगी? 

रात्रि प्रेतों के पाखंड से झुलस
किस प्रकार अघोर बनी होगी? 

आज की दरिंदगी आज ही खत्म
अगले प्रसंग तक गोर थोड़ी न होगी? 

~ चेतना 🌻




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