आशिक़

हर किसी की हैसियत नहीं
कि उसके आशिक़ की 
आँखों में आँखें डाल 
उसे मौत नसीब हो 
उसे मौत कहे या जन्नत

मुझे खौफ़ हो रहा है
इश्क़ से , शायरी से 
गुलाबों से, ग़ज़लों से 
नाकामयाबी से और
मोहब्बत में तबाही से

ख्वाइश है मेरी
फिदा हो जाने की
गुनाहों से इश्क़ में
जुदा हो जाने की 
और ख़फ़ा हो जाने की

हसरत देखी है मैंने
आशिक़ की निगाहो में
कुदरत देखी है मैंने
आशिक़ की बाहों में 
देखा है मैंने आशिक़ को

फुरसत भी नहीं मुझे
नुमाइश करने से 
बेवक़्त बेमिज़ाज़ 
फरमाइश करने से
इश्क़ को जाईज करने से। 

~चेतना 🌻

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