मुझे तुम पर लिखते जाना है
मेरे शहर में ढूंढा मुझे तुमने,
मुझे तेरा नया शहर बनाना है।
समेट कर बेताबी खुद की,
मुझे तेरा गाँव बन जाना है।।
देख रिस्ती रेत को काँच में,
मुझे चुप्पी सा थम जाना है।
तेरी गली के मोड़ पर ठहर,
मुझे तेरा इंतज़ार बन जाना है।।
बेरूख और बेरंग रह कर सदा,
मुझे तुमसे राबता निभाना है।
दुआ, अरदास और प्रेम में,
मुझे तेरी किस्मत बन जाना है।।
दीवाना कहते है जिसे इतिहास में,
मुझे वही प्रेम बखूबी दोहराना है ।
तमाशे भुला कर पुराने सारे,
मुझे तेरा आज बन जाना है।।
~चेतना 🌻
♥️🐢
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