बारिश

मैं कैसे भूल जाऊ
वो बारिश
जिसने बिघाया था 
तुम्हें और मुझे 
अलग अलग
किसी दिन एक कर जाने के लिए ।

मैं कैसे भूल जाऊ 
वो बारिश
जिसने आजमाया था 
वक्त मेरा 
तुम्हारे साथ 
थोड़ा और बिगड़ जाने के लिए।

मैं कैसे भूल जाऊ 
वो बारिश 
जिसने तड़पाया था 
मन तुम्हारा
मेरे कन्धों पर
बेपरवाह रो जाने के लिए।

मैं कैसे भूल जाऊ
वो बारिश
जिसने तरसाया था 
आधा मुझे
आधा तुम्हें
समस्त होकर डूब जाने के लिए।  

मैं कैसे भूल जाऊ 
वो बारिश 
जिसने उकसाया था 
पहली दूसरी 
तीसरी और 
हर बार होने वाली 
बारिश को
हमारे प्रेम को जीवित कर जाने के लिए।। 

~चेतना 🌻





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