आज मुर्दे की मौत आई है
अमावस की रात में भी,
अनदेखी रोशनी छाई है।
बादल ना होकर भी,
नयनों से बाढ़ आई है।।
पूरे डेढ़ साल बीते बाद,
मां की चिट्ठी याद आई है।
पुरानी दराज खोली मैंने,
हिम्मत आज अलग आई है।।
रूठी और खाली मुठ्ठी,
अहंकार में नजर आई है ।
चैन से बैठू कैसे अब ,
विद्रोह ने खबर सुनाई है।।
लूट कर टहनी के फूल,
लुटेरों ने दौलत कमाई है।
धर्म को बलिदान बता,
इंसानियत की शामत आई है।।
इस पल के जीवन ने ,
अगले पल की मौत छुपाई है।
मसान मैं छोड़ आया मगर,
आज मुर्दे की मौत आई है।।
~चेतना 🌻
Excellent fantastic fabulous outstanding extraordinary awesome great ……. Bla bla bla
ReplyDelete♥️♥️🌴🦒
ReplyDeleteWonderfull written ❤️❤️
ReplyDeleteWell written bruhh
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