इश्क़
अबकी बार
मेरे इश्क का जवाब
हा में मत देना ।
थोड़ी सी बेचैनी
मेरे इश्क को भी
तोहफे में देना ।
नजरंदाज कर
मुझे गुलज़ार पढ़ने
को मजबूर कर देना।
मेरे सामने ही
तुम्हारी महबूबा से
इज़हार कर देना।
उसे गुलाब थमाकर
मेरे गुलाब को
बदनाम कर देना।
मेरी शायरी पढ़ो
तो अनजान बन
इनकार कर देना।
ज़रा मेरे खत
को चार टुकड़ों
में बर्बाद कर देना।
फुरसत मिले
तो मुझे इश्क़ में
शर्मशार कर देना।
अबकी बार
इतनी खैरियत करू तो
मेरे इश्क़ को तबाह कर देना।।
~चेतना 🌻
❤️😻
ReplyDelete❤️ 💙
ReplyDeleteरोज इक ताजा शेर
ReplyDeleteकहा तक लिख पाओगी
तुझमें तो रोज ही...
एक नई बात हुआ करती है ।
Nyc 🔥
ReplyDelete❤️✨wahh
ReplyDeleteKya likha hai bohot sundar ✨
ReplyDeleteAmazing written👌
ReplyDeleteKy Baat ! 🫶🏻🌸
ReplyDelete👏✨✨
ReplyDeleteवाह अति सुंदर 😌 आहाहा आनंद आ गया वाह 👌👌
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